बुद्ध के अनुयायी नागवंशी
बुद्ध के अनुयायी नागवंशी : tpsgnews.com
Wednesday, June 26, 2019, 09:22 AM
नागवंश आज से 2500 साल पहले बुद्ध का अनुयाई था, उन्ही नागवंशियों की संतानें है हम, हमारे पूर्वज बुद्ध को पूजते थे, बुद्ध के अनुयायी नागवंशी होने के कारण, जब पुष्यमित्र शुंग ने आदेश दिया की जो भी बोद्ध भिक्खुओ का सर काट कर लाएगा उसको 100 स्वर्ण मुद्राएं दी जाएगी तब बुद्ध धम्म यहा से समाप्त हुआ और वो दूसरे देशों में जा पहुचा लेकिन बुद्ध की शिक्षाएं हमारे लोगो ने अपने पास हमेशा रखी । वो उन 7 नाग की पूजा करते थे जिनको आज भी नागपंचमी की कहानी के रुप मे भारत के कई हिस्सों में पूजा जाता है ।
तब 2500 साल तक इन नागवंशियों या महारो को गुलाम बना कर रखा और फिर बाबा साहब का जन्म हुआ जिन्होंने धर्म मे व्याप्त रूढ़ियों और सिद्धांतों की जनक मनुस्मृति को जला दिए 25 दिसंबर 1927 को उसके आगे उन्होंने 1935 में घोषणा किये की मेंरा जन्म हिंन्दू धर्म मे हुआ ये मेरे बस की बात नहि ,लेकिन में हिन्दू मरूँगा नही ये मेरे बस की बात है तब 21 साल तक सभी धर्मों का अध्ययन करने के बाद उन्होंने बुद्ध के धम्म को भारत मे पुनर्जीवित किये और इस महान कार्य को करने के लिए उन्होंने नागवंशियों की पवित्र भूमि नागपुर को चुने और वहां उन्होंने बुद्ध धम्म को अपना लिए ।
वही में कहना चाह रहा था ये वही नाग वंशीय लोग है जिसको बाद मे महायान और हीनयान ने नाग ( सात मुह वाले साप) में परिवर्तित कर दिये । लेकिन ये जो नाग है वो नाग न होकर नागवंशीय लोग है जो हमारे पूर्वज है । जिनकी पूजा हम हमेशा से करते आये है जिनको सर्प मान बैठे है कुछ लोग जो गलत है ।
- शैलेष रामटेके
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