ऐसे हुई थी नागवंश की उत्पत्ति


ऐसे हुई थी नागवंश की उत्पत्ति

Updated: | Thu, 04 Aug 2016 04:40 PM (IST)

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित और भगवान श्रीगणेश द्वारा लिखित 'महाभारत' में नाग देवता का उल्लेख मिलता है। दुनिया के सबसे बड़े ग्रंथ के अनुसार महर्षि कश्यप की 13 पत्नियां थीं। इन्हीं में से 'एक थी कद्रू'।

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कद्रू ऋषि की बहुत सेवा करती थी। ऋषि ने एक बार खुश होकर कद्रू से वर मांगने को कहा, तो कद्रू ने वर मांगा कि उसके एक हजार तेजस्वी नाग पुत्र हों। ऋषि ने यह वर दे दिया। निश्चित समय के बाद कद्रू के एक हजार नाग पुत्र हुए। इस तरह नाग वंश की उत्पत्ति हुई।

पुराणों में वर्णित है कि सात नागवंशी राजा मथुरा पर राज करेंगे। उसके पीछे गुप्त राजाओं का राज्य होगा। नौ नाग राजाओं के जो पुराने सिक्के मिले हैं, उन पर 'बृहस्पति नाग', 'देवनाग', 'गणपति नाग' इत्यादि नाम मिलते हैं।

वहीं, पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि कश्मीर का अनंतनाग इलाका अनंतनाग समुदायों का गढ़ था। उसी तरह कश्मीर के बहुत सारे अन्य इलाके भी कद्रु के दूसरे पुत्रों के अधीन थे। कुछ अन्य पुराणों के अनुसार नागों के प्रमुख पांच कुल थे अनंत, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक और पिंगला।

जबकि कुछ और पुराणों ने नागों के अष्टकुल बताए गए हैं, वासुकी, तक्षक, कुलक, कर्कोटक, पद्म, शंख, चूड़, महापद्म और धनंजय। अग्निपुराण में 80 प्रकार के नाग कुलों का वर्णन है, जिसमें वासुकी, तक्षक, पद्म, महापद्म प्रसिद्ध हैं।

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